हम क्या हैं, वो क्या जाने?
हम क्या हैं,
वो क्या जाने?
पंख बनके,
चट्टान-सा खड़े हैं।
चाँद बनके,
धूप-सा खिले हैं।
नदी बनके,
मशाल-सा जले हैं।
हम क्या हैं,
वो क्या जाने?
सबको समेट के,
खुद बिखरे हैं।
आँखों में आक्रोश,
दिल में अरमाँ सजे हैं।
बनकर साथी अपना,
खुद से भी लड़े हैं।
हम क्या हैं,
वो क्या जाने?
अँधेरों में जुगनू बने,
ग़मों में खुद को
कंधे दिए हैं।
बांध के आँसू अपने,
झोले में खुशियाँ
बिखेरने चले हैं।
कहती ये दुनिया
ग़लत हमको,
कहकर सही उन्हें
हम खुद पर हँसे हैं।
हम क्या हैं,
वो क्या जाने?
क़ाफ़िलों में चलने वाले,
अपने दम पर
खुद की राह चुनने
वालों की कीमत
क्या जाने?
हम क्या हैं,
हमसे बेहतर
कोई न पहचाने,
हमसे बेहतर
कोई न जाने।
:) Khushi


WoW✨🤌🏻
🥹🫂..Bahut badhiya👏👏👏…