मदहोश
ना ग़म है
ना क्रोध
ना सपने
ना प्रतिशोध
जियें तो जियें
किस बात के लिए
मरने की भी
कोई वजह तो नहीं
कहे तो कहे
किससे
सुनने के लिए भी
कोई खड़ा तो नहीं
मदहोश हैं अब हम
संभले न
संभल रहे
ग़मों के यार हैं
हँसी है
खल रही
आम अब हम
रहे नहीं
ख़ास को
समझने की
समझ किसी
ख़ास में
रही नहीं
मगर फिर भी
हैं चल रहे
जिस ओर भी
ये साँसें
ले चल रही
:) Khushi


Ati Sundar!
loved it💝